Saturday, August 15, 2009

स्वतंत्रता दिवस - गुलामी की बेड़ियों को तोड़ कर नए क्षितिज में प्रवेश


आज स्वतंत्रता दिवस है। वह पवित्र दिन, जब भारत ने गुलामी की बेड़ियों को तोड़ कर नए क्षितिज में प्रवेश किया था। इस अवसर पर कुछ सवालों के जरिए टटोला सेलेब्रिटीज के दिल में बसे भारत को-


यह थे प्रश्न]
1. भारत की आजादी के 62 सालों में आपकी नजर में विशिष्ट परिवर्तनकारी कदम क्या रहा है?
2. विदेश यात्रा के दौरान भारत के बारे में पूछा जाने वाला सबसे जटिल अथवा मुश्किल सवाल क्या होता है?
3. यदि आपको वरीयता दी जाए तो क्या बेहतर जीवन के लिए आप देश छोड़ देंगे? आप कहाँ रहना चाहेंगे और क्यों?
4. आपको किस भारतीय पर सर्वाधिक गर्व होता है?
5. आपकी नजर में किस फिल्म या गीत में भारत को बेहतर ढंग से परिभाषित किया गया है?
6. यदि आपको तीन चीजों को नियंत्रित करने का अवसर मिले तो किसे चुनेंगे?
[देश को तरसते हैं एनआरआई]
* देश की चतुर्दिक तरक्की हुई है। शिक्षा, आजीविका, जीवनशैली एवं व्यापार व प्रौद्योगिकी में हमने काफी प्रगति दर्ज की है। इन सभी क्षेद्दों में महिलाओं की भागीदारी एक बड़ा परिवर्तनकारी कदम है। मुझे गर्व होता है अपने देश की शिक्षा पर, जिसकी बदौलत हमारे देश के डॉक्टर और इंजीनियर पूरी दुनिया में धूम मचा रहे हैं।
* भारत के बारे में विदेशी यह सवाल अक्सर पूछते हैं कि अलग-अलग भाषा और मजहब के लोग एक साथ कैसे रह पाते हैं? तब मुझे यह कहना पड़ता है कि इसका जवाब यहां रह कर ही मिल सकता है। इसे समझा पाना संभव नहीं है।
* जो लोग देश छोड़कर बाहर रहते हैं, मुझे उनकी मानसिकता पर बड़ा क्षोभ होता है । अपने कार्यक्रमों के दौरान विदेशों में हमने अनेक भारतीय परिवारों को सुसज्जिात घरों में ऐशो-आराम से रहने के बावजूद भारत के लिए रोते देखा है।
* जिस भारतीय पर गर्व है वह हैं सचिन तेंदुलकर। वह राष्ट्र को सर्वोपरि रखकर खेलते हैं। मुझे वह घटना याद आती है जब पिता के निधन के बाद भी वह मैदान में आकर खेले थे।
* आनंदमठ में गाया गया बंकिमचंद्र चटर्जी का लिखा गीत वंदे मातरम्।
* मैं जिन तीन चीजों को चुनूंगी वह हैं जनसंख्या पर नियंद्दण, आर्थिक खाई को पाटने का प्रयत्न, राजनीति में अशिक्षित एवं अपराधी के आने पर पूर्ण प्रतिबंध।
[मालिनी अवस्थी: शास्द्दीय एवं लोकगायिका]
[बड़ी बात है झंडे पर सबका हक]
* पहले केवल 15 अगस्त या 26 जनवरी को ही राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाता था, वहीं अब साल के 365 दिन इसे फहराते हुए देखा जा सकता है। पहले कुछ गणमान्य लोगों को प्रतिष्ठानों, कार्यालयों पर ध्वज फहराने का अधिकार था, लेकिन अब आम आदमी भी अपने घर, प्रतिष्ठान, फैक्ट्री, स्कूल, होटल व निजी भवन पर राष्ट्रीय ध्वज फहरा सकता है। इससे बड़ा परिवर्तनकारी कदम मेरी समझ में और कोई नहीं है, क्योंकि देश के प्रति प्रेम और कत्र्ताव्य की भावना ही किसी देश के विकास की रीढ़ होती है। लोगों के रहने का स्तर न केवल महानगरों में ऊपर उठा है, बल्कि देश के गांव-गांव में हर आदमी को मौलिक व भौतिक सुविधाएं दी जा रही है। गांवों को शहरों से जोड़ती पक्की सड़कें, लोगों की आर्थिक उन्नति के प्रति जागरुकता, शिक्षा के प्रति सजगता, देश के हर कोने में यातायात के सर्वोत्ताम साधन, जैसे रेल, हवाई जहाज, बस सेवा एवं सड़कों पर दौड़ती मोटर-कारे, मोबाइल फोन का प्रयोग, देश के विकास को दर्शाता है। हाल ही में हुआ परमाणु समझौता निश्चित रूप से भारत में विकास की एक नई क्रांति लाएगा।
* नहीं, मैं किसी भी दशा में अपने देश को नहीं छोड़ना चाहती। मुझे अपने देश पर गर्व है और मैं अपना जीवन देश और समाज की उन्नति के लिए ही समर्पित करना चाहती हूं।
* मुझे गर्व है भारत रत्न पूर्व राष्ट्रपति ए.पी.जे. अब्दुल कलाम पर। उन्हीं के कारण भारत को पूरे विश्व में परमाणु शक्ति की पहचान मिली है।
* मेरी निगाह में दो फिल्में और उनके गीत हैं। पहली पूरब और पश्चिम जिसका गीत है प्रीत जहां की रीत सदा तथा दूसरी है फिल्म उपकार जिसका गीत मेरे देश की धरती सोना उगले, उगले हीरे मोती भारत को बेहतर ढंग से परिभाषित करता है।
* भ्रष्टाचार, जातिवाद और रुढि़वाद देश के विकास के लिए सबसे बड़ी बाधाएं है। इनपर प्रतिबंध तो लगाया गया है, लेकिन यह आज भी व्यापक रूप से समाज में व्याप्त है। इनको जड़ से उखाड़ना चाहिए।
[शालू जिंदल: कुचिपुड़ी नृत्यांगना एवं समाजसेवी]
[पूर्वाग्रह छोड़ें विदेशी]
* आज टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में हम तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। हर जगह घर की छतों पर डिश एंटेना और लोगों के हाथों में मोबाइल दिखते हैं। मुझे अपने देश के चौतरफा विकास पर गर्व होता है।
* विदेशों में अभी तक लोग मानते हैं कि भारत सांप व बंदर का देश है और सड़कों पर गाय घूमती रहती है। वे हमारी परंपरा को पिछड़ेपन और अंधविश्वास का नाम देते हैं। वे नहीं समझ पाते कि यह हमारी आस्था से जुड़ा है। मुझे लगता है कि भारत सरकार को देश की प्रगति और विकास का धुआंधार प्रचार करना चाहिए।
* दुनिया की सैर करना जरूरी है। उससे हमें जानकारी मिलती है कि और देशों में क्या हो रहा है? अगर हमारी फिल्में विदेशों में चलें और वहां से धन मिले, तो खुशी होगी, लेकिन तन और मन से मैं हमेशा भारत में रहना चाहूंगा।
* किसी भारतीय पर गर्व करने या उसका नाम लेने की बात करें, तो मैं एक से अधिक नामों का उल्लेख करना चाहूंगा। महाराणा प्रताप, शिवाजी, सुभाषचंद्र बोस, वीर सावरकर आदि इन सभी के बगैर हम आजादी की सांस नहीं ले पाते। आजादी के बाद की हस्तियों में अभी इंदिरा गांधी याद आ रही हैं।
* मनोज कुमार की फिल्म पूरब और पश्चिम का गाना 'जब जीरो दिया मेरे भारत ने ़ ़ ़' भारत के गौरव का समुचित गान करता है।* अगर देश में किसी व्यवहार और प्रवृत्तिपर पाबंदी लगाने का अधिकार मिले, तो मैं सबसे पहले गर्भ परीक्षण पर पाबंदी लगा दूं। बालिकाओं की भ्रूण हत्या चिंताजनक है। दूसरी पाबंदी सांप्रदायिक दंगों पर लगाऊंगा। तीसरी, कानूनी भेद-भाव खत्म करना चाहूंगा। सभी को समान अधिकार और सुविधा मिले।
[मधुर भंडारकर: फिल्म निर्देशक]
[गर्व है भारतीय होने पर]
* देश ने टेक्नोलॅाजी, साइंस, डिजाइन, फिल्म, मशीनरी, इंजीनियरिंग और आईटी में विशेष उपलब्धि पाई है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यहां यंग पॉपुलेशन भी विश्व में सबसे अधिक है। यह दुनिया का सबसे बड़ा प्रजातांत्रिक देश है।
* जब भी मैं बाहर जाता हूं, तो लोग यकीन नहीं करते कि मैं भारतीय हूं। जब मैं उन्हें यकीन दिलाता हूं, तो उन्हें हैरत होती है। वे अक्सर सवाल करते हैं कि आप कैसे इतनी अच्छी अंग्रेजी बोलते हैं?
* मैं अभी तक 22-23 देशों में घूम चुका हूं। मुझे अपने भारतीय होने पर बहुत गर्व है, क्योंकि हम लोग अब भी अपनी पारंपरिक संस्कृति को नहीं भूले हैं। हम आधुनिक होते हुए भी परंपराओं का लिहाज करते हैं।
* मुझे अपना वतन ही प्यारा है। मैं अपना देश किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ सकता हूं। फिर भी अगर किसी दूसरी जगह जाना ही पड़े, तो मैं जापान जाना अधिक पसंद करूंगा। यदि हम लोग जापानियों से सीख लें, तो हम भी नंबर वन बन सकते हैं। जापानियों में आज भी इंसानियत है। यह कहना गलत नहीं होगा कि वहां आज भी रामराज्य है।
* फिल्म पूरब और पश्चिम का गाना, मेरे देश की धरती सोना उगले, उगले हीरे-मोती.. इस गाने में भारत को बेहतर ढंग से परिभाषित किया गया है।
* अगर मुझे नियंत्रित करने का अवसर मिले, तो मैं सबसे पहले भ्रष्टाचार, भुखमरी और निरक्षरता पर अंकुश लगाऊंगा।
[जतिन कोचर: फैशन डिजाइनर]
[यहीं लूंगी आखिरी सांस]
* आजादी के बाद देश में भौतिक समृद्घि बढ़ी है, आर्थिक विकास हुआ है, लेकिन इस परिवर्तन की गति बहुत धीमी है। इसमें सुधार की आवश्यकता है। आई.आई.टी. जैसे तकनीकी संस्थानों की संख्या बढ़ रही है। महिलाओं की हर क्षेत्र में भागीदारी बढ़ी है।
* आजाद हिंद फौज में शामिल होने के बाद मैंने कभी विदेश यात्रा नहीं की। हाँ, लोगों से सुना जरूर है कि आज भी भारतीय अपमानित किये जाते हैं। इसके पीछे भी दोष हमारी लचर राजनीति और सरकार का है।
* मेरा जन्म ही विदेश में हुआ था। नेताजी सुभाषचंद्र बोस के साथ जुड़ने के बाद मैं भारतीय हो गई। मेरी वरीयता में आजादी थी। वह मिल गई। स्वतंत्र राष्ट्र में सांस ले रही हूं। यहीं अंतिम सांस लूंगी। विदेश में बसने के बारे में कभी सपने में भी नहीं सोचा।
* मुझे जिस भारतीय पर सबसे अधिक गर्व होता है वह हैं नेताजी सुभाष चंद्र बोस। उन जैसा व्यक्तित्व भारत में दूसरा नहीं हुआ। वे आजादी के सिपाही थे जिन्हें, अधिकारों की लड़ाई लड़ने की आध्यात्मिक समझ थी। उनकी सूझबूझ का विदेशी भी लोहा मानते हैं।
* उपकार फिल्म का गाना मेरे देश की धरती सोना उगले, उगले हीरे मोती भारत की शान को इंगित करता है।
* नशा, भ्रष्टाचार और जातिगत आरक्षण वर्तमान में देश की सबसे बड़ी समस्याएं हैं।
[मानवती आय्र्या: स्वतंत्रता संग्राम सेनानी]
[कहां मिलेगी ऐसी संस्कृति]
* अन्नक्षेद्द में और सुरक्षा के क्षेद्द में आत्मनिर्भरता। आज हम परमाणु हथियार संपन्न राष्ट्र हैं, लेकिन यह सिर्फ आत्मरक्षा के लिए है। इससे किसी को डर नहीं लगता, क्योंकि सब जानते हैं कि भारत एक शांतिप्रिय देश है। यह तब तक दूसरों पर हमला नहीं करेगा, जब तक दूसरे इससे छेड़छाड़ न करें। परमाणु ऊर्जा के क्षेद्द में हमारी आत्मनिर्भरता एवं विकास के कार्यो के लिए उसका उपयोग होता देख हमें अपने देश पर गर्व होता है।
* विदेशों में भारत के बारे में पूछा जानेवाला सबसे जटिल प्रश्न यह है कि संस्कृति और संस्कारों से धनी देश इतना निर्धन क्यों है?
* मैं अपना देश बिल्कुल नहीं छोड़ना चाहूंगा। इसके दो कारण हैं-पहला, मेरा देश मेरे लोगों का देश है जिनसे मैं बिछड़ना बिल्कुल नहीं चाहूंगा। दूसरा, हमें अपने देश जैसी संयुक्त परिवार की संस्कृति कहीं और नहीं मिलेगी।
* जिस भारतीय पर मुझे सर्वाधिक गर्व होता है वह हैं सरदार वल्लभभाई पटेल ।
* मेरी दृष्टि में पूरब-पश्चिम फिल्म का गाना है प्रीत जहां की रीत सदा , मैं गीत वहीं के गाता हूं में भारत को बेहतर ढंग से परिभाषित किया गया है।
* मैं जिन तीन चीजों को नियंत्रित करना चाहूंगा वह हैं आबादी, धर्म के नाम पर राजनीति एवं सांप्रदायिक भावना फैलानेपर।
[उज्जवल निकम: 37 आतंकियों को मृत्युदंड की सजा सुनवा चुके विशेष सरकारी वकील]



श्याम tyagi