
वक्त के साथ इंडस्ट्री की डिमांड बदली है और स्टूडेंट्स की च्वाइस भी। स्टूडेंट अब कुछ ऐसा नया करना चाहते हैं, जिससे वे इंडस्ट्री में एक अलग मुकाम बना सकें। इस अंक में हम कुछ ऐसे ही नए कोर्सो के बारे में पडताल कर रहे हैं, जिनमें आने वाले दिनों में अच्छी संभावनाएं देखी जा रही हैं। जैव विविधता
ग्लोबल वार्मिग पूरे विश्व के लिए गंभीर समस्या बन गई है। इसकी वजह से जीव-जंतुओं की कई प्रजातियां विलुप्त होने की कगार पर पहुंच गई हैं। इसीलिए अब कनजर्वेस्टनिस्ट की मांग जोर पकड रही है। गुरु गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी ने बायो डायवर्सिटी ऐंड कनजर्वेशन में मास्टर प्रोग्राम लॉन्च किया है। इसमें थ्योरी के साथ-साथ प्रैक्टिकल पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। इस फील्ड में आने के लिए जैव विविधता की अच्छी जानकारी जरूरी है, जैसे-बायो डायवर्सिटी यानी जैव विविधता के बारे में मूल्याकंन, साइट सर्वे, साइट मैनेजमेंट, जिओ इन्फॉर्मेंटिक सिस्टम आदि। प्रोग्राम खत्म करने के बाद रोजगार के लिए इंटरनेशनल एनजीओ, वर्ल्ड वाइल्डलाइफ फंड और नेशनल वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन ग्रुप में कोशिश कर सकते हैं। इसके अलावा, मिनिस्ट्री ऑफ एनवायरनमेंट ऐंड फॉरेस्ट ऐंड एडवाइजरी बोर्ड में भी नौकरी की अच्छी संभावनाएं हैं। आवेदन करने के लिए बीएससी में कम से कम 50 प्रतिशत अंक होने चाहिए। एंट्री प्रवेश परीक्षा के आधार पर होती है।
फैशन स्टाइलिंग
फैशन स्टाइलिंग से जुडे पेशवर एक असाइनमेंट के लिए करीब 15 से 20 हजार रुपये तक लेते हैं। भारत के लिए फैशन स्टाइलिंग का कॉन्सेप्ट नया है, लेकिन अब फैशन के प्रति लोगों के बढते क्रेज की वजह से इस फील्ड में काफी स्कोप हैं। यदि आप लोगों को स्टाइलिश बनाने का हुनर रखते हैं, तो फैशन स्टाइलिंग में काफी अच्छा करियर हो सकता है। इस फील्ड में सफलता इस बात पर भी निर्भर करती है कि आप खुद की मार्केटिंग किस तरह से कर पाते हैं! साथ ही, फैशन वर्ल्ड के नए ट्रेंड की जानकारी भी जरूरी है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी या इससे संबद्ध प्राइवेट संस्थानों में संबंधित कोर्स उपलब्ध हैं। कोर्स में मेकअप नॉलेज, हेयर स्टाइल, फोटोग्राफी, कम्प्यूटर और आईटी ऐप्लिकेशन के बारे में जानकारी दी जाती है। एंट्री के लिए 12वीं पास होना जरूरी है। कोर्स पूरा करने के बाद फैशन हाउस, एड फिल्म, फिल्म इंडस्ट्री, इवेंट मैनेजमेंट कंपनी आदि में रोजगार की तलाश कर सकते हैं।
हेल्थ मैनेजमेंट
प्राइसवाटरहाउसकूपर्स के मुताबिक हेल्थकेयर सेक्टर का आकार वर्ष 2010 तक 40 बिलियन डॉलर यानी 40 अरब डॉलर के आंकडे को पार कर सकता है। वहीं मैकिंजे-सीआईआई की एक रिपोर्ट के अनुसार, मेडिकल टूरिज्म का मार्केट भी वर्ष 2012 तक दो अरब डॉलर का हो जाएगा। जब हेल्थकेयर इंडस्ट्री इतनी तेजी से बढ रही है, तो ट्रेंड प्रोफेशनल्स की जरूरत पडेगी ही। यदि आप एमबीए इन हेल्थकेयर मैनेजमेंट करना चाहते हैं, तो इस कोर्स के अंतर्गत पहले साल में मैनेजमेंट स्किल, हेल्थकेयर लॉ और रेगुलेशन के बारे में पढाया जाता है, जबकि सेकेंड ईयर में हॉस्पिटल ऑपरेशन मैनेजमेंट या मेडिकल टूरिज्म आदि में स्पेशलाइजेशन कर सकते हैं। प्लेसमेंट की बात करें, तो कोर्स पूरा करने के बाद हेल्थकेयर एग्जीक्यूटिव के तौर पर हॉस्पिटल, हॉस्पिटल ऑर्किटेक्चर फर्म में एडवाइजर, मेडिकल सुपरिटेंडेंट, चीफ मेडिकल ऑफिसर, ट्रैवल इंडस्ट्री में कंसल्टेंट आदि के रूप में करियर की शुरुआत कर सकते हैं। मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से साइंस, फार्मेसी और मेडिसिन में स्नातक की डिग्री रखने वाले स्टूडेंट्स इस कोर्स में एंट्री ले सकते हैं। यहां सैलरी भी काफी अच्छी है। एंट्री लेवल सैलरी 15 से 20 हजार रुपये के करीब होती है।
इंडस्ट्रियल एरिया प्लानिंग
देश की इंडस्ट्रीज के विकास के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं। इसमें स्पेशल इकोनॉमिक जोन, स्पेशल इन्वेस्टमेंट रीजन और इंडस्ट्रियल टाउनशिप भी शामिल हैं। यही वजह है कि इंडस्ट्रियल एरिया मैनेजमेंट और प्लानिंग आज इंडस्ट्री की जरूरत बन गई है। पेशेवरों की बढती हुई डिमांड को देखते हुए इंडस्ट्रियल एरिया प्लानिंग ऐंड मैनेजमेंट में एमटेक कोर्स की शुरुआत की गई है। इससे जुडे स्टूडेंट्स इंडस्ट्रियल एरिया के प्लानिंग, डिजाइनिंग, डेवलपमेंट और मैनेजमेंट के क्षेत्र में काम करते हैं। जहां तक जॉब की बात है, तो गवर्नमेंट डिपार्टमेंट के साथ-साथ एनजीओ, रिसर्च ऐंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन, कंसल्टेंसी ऑर्गनाइजेशन आदि में संभावनाएं हैं। इस कोर्स में प्रवेश के लिए ऑर्किटेक्चर/ सिविल इंजीनियरिंग/ प्लानिंग में बैचलर डिग्री या फिर जिओग्रफी /इकोनॉमिक्स/सोशयोलॉजी में मास्टर डिग्री रखने वाले स्टूडेंट्स आवेदन कर सकते हैं।
डाटा स्टोरेज
इंडस्ट्री में आज ऐसे लोगों की कमी महसूस की जा रही हैं, जो डेटाज को सही तरीके से मैनेज कर सकें। इसी बात को ध्यान में रखते हुए स्टोरेज नेटवर्किंग इंडस्ट्री एसोसिएशन ने ट्रेनिंग प्रोग्राम ऑफर किया है। इस कोर्स में एंट्री के लिए आईटी की बेसिक जानकारी के साथ-साथ आईटी कंपनी में कम से कम छह महीने तक काम करने का एक्सपीरियंस जरूरी है। डाटा स्टोरेज पेशेवर की शुरुआती सैलरी 10 से 12 हजार रुपये तक होती है।
क्लीनिकल रिसर्च
मैकिंजे की एक रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2013 तक क्लीनिकल रिसर्च के क्षेत्र में 50 हजार पेशेवर लोगों की जरूरत होगी। इतना ही नहीं, ग्लोबल फार्मा कंपनियों का रुख भारत की तरफ होने से इस क्षेत्र में स्कोप काफी बढ गया है। कुछ इंस्टीट्यूट्स ने क्लीनिकल रिसर्च से जुडे कोर्स की शुरुआत की है। एमबीबीएस, बीडीएस, बीएएमएस, बीएचएम, बीई, बी टेक, बीफार्मा, बीएससी नर्सिग आदि की डिग्री रखने वाले स्टूडेंट्स क्लीनिकल रिसर्च से जुडे कोर्स में एडमिशन ले सकते हैं।
पब्लिक मैनेजमेंट
यदि आप चाहें, तो पब्लिक मैनेजमेंट ऐंड पॉलिसी में पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स कर सकते हैं। इसमें गवर्नेंस, पॉलिसी, क्रियान्वयन, इन्फ्रॉस्ट्रक्चर डेवलपमेंट और पब्लिक एंटरप्राइज मैनेजमेंट पर फोकस किया गया है। किसी भी विषय से स्नातक करने वाले छात्र इस कोर्स के लिए आवेदन कर सकते हैं। आवेदन करने वाले स्टूडेंट्स की उम्र 27 वर्ष से कम नहीं होनी चाहिए। कोर्स पूरा करने के बाद पब्लिक सेक्टर के साथ-साथ प्राइवेट सेक्टर की कंपनियों में जॉब की तलाश कर सकते हैं। प्राइवेट कंपनियों की बात करें, तो अर्नेस्ट यंग, मैकिंजे, जीएमआर और रिलायंस जैसी कंपनियों में भी अच्छा मौका है।
डेवलपमेंट फाइनेंस अगर आप इस क्षेत्र में आना चाहते हैं, तो पोस्ट-ग्रेजुएट डिप्लोमा इन मैनेजमेंट डेवलपमेंट ऐंड सस्टेनबल फाइनेंस कोर्स कर सकते हैं। कोर्स में एडमिशन लेने के लिए 10वीं, 12वीं और ग्रेजुएशन में फर्स्ट डिवीजन होना जरूरी है। इसके अलावा, कैट स्कोर में कम से कम 85 प्रतिशत अंक होने पर ही एडमिशन के लिए विचार किया जा सकता है। जहां तक प्लेसमेंट की बात है, तो एनजीओ, डेवलपमेंट कंपनी, बैंक आदि में नौकरियां मिल सकती हैं।
मेट्रो टेक्नोलॉजी
इस समय मेट्रो का विस्तार देश के कई प्रमुख शहरों में हो रहा है। यही वजह है कि मेट्रो टेक्नोलॉजी में पेशेवर लोगों की मांग बढ गई है। इसी को ध्यान में रखते हुए आईआईटी, दिल्ली और दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने एक समझौता किया है। जिसके तहत पेशेवर लोगों को मेट्रो टेक्नोलॉजी में ट्रेंड किया जाएगा। यह एक साल का प्रोग्राम है। इसमें 12 कोर्स हैं। एक्सपर्ट के मुताबिक इस समय देश में कंस्ट्रक्शन और मेट्रो रेल सिस्टम के ऑपरेशन से जुडे ट्रेंड लोगों की काफी कमी है। बीटेक या फिर बीआर्क की डिग्री रखने वाले स्टूडेंट्स इस कोर्स में एडमिशन ले सकते हैं।
पैकेजिंग और प्रिंटिंग
जो दिखता है, वही बिकता है। यह बात पैकेजिंग और प्रिंटिंग इंडस्ट्री पर भी लागू है। जिस प्रोडक्ट की पैकेजिंग जितनी अच्छी होती है, ग्राहक की नजर में वह उतनी ही जल्द चढ जाता है। इन दिनों भारत में पैकेजिंग इंडस्ट्री रफ्तार पकड रही है। इसीलिए पैकेजिंग से जुडे लोगों की मांग भी बढ रही है। यदि आप इस क्षेत्र में आना चाहते हैं, तो आपके लिए सर्टिफिकेट प्रोग्राम इन पैकेजिंग, पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा, एग्जीक्यूटिव डेवलपमेंट प्रोग्राम आदि कोर्स उपलब्ध हैं। इसमें पैकेजिंग डिजाइन ऐंड डेवलपमेंट, प्रिंटिंग और पैकेजिंग मशीन, क्वालिटी कंट्रोल पर अधिक जोर दिया जाता है। कोर्स खत्म करने के बाद एफएमसीजी कंपनी, एक्सपोर्ट हाउस और पि्रंटिंग कंपनी में काम कर सकते हैं। 12वीं और ग्रेजुएशन के बाद इस कोर्स में एडमिशन ले सकते हैं।
(परवीन मल्होत्रा, अनिल सेठी से बातचीत पर आधारित)
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