Tuesday, January 10, 2012

और तेरी आवाज यूँही दबा दी गयी

तेरी आवाज 
यूहीं दबा दी गयी
तू  कुछ कर ना सका
इसलिए किसी ने तेरे लिए कुछ ना किया
कल कोई 'अपने' लिए तरसेगा
क्योंकि 'अपने' लिए भी कोई कुछ ना करेगा
जो कर सकते थे 
वो लोग मजबूर हो गए
या बेसर्मी का लिबास ओढ़ लिया
एक दिन तमाशा हर तरफ होगा 
आग हर जगह लगेगी 
पर पानी गेरने वाला कोई नही मिलेगा 
तेरे जीवन से तांडव नुमा खेल कर दिया 
कुछ तो बात थी
जो तुझपे बेवजह का सितम ढा दिया
तुने खुद अपनी आवाज ना उठाई , 
आज हमें अपनी बेसरमी पे अफ़सोस होता है 
की हम भी कुछ कर न सके,
और तेरी आवाज यूँही दबा दी गयी 
पर कब तक, एक दिन तो आएगा , तेरी भी तूती बोलेगी , बेसर्मो के मुंह से लिबास उठेगा और हर तरफ तेरी ही आवाज गूंजेगी..


( एक मित्र को समर्पित ये कुछ लाईने, जिसके लिए मैं कुछ कर ना सका और आज अफ़सोस होता है की मैं कुछ करने लायक ही नही था  ) 

Saturday, January 7, 2012

अभिव्यक्ति की आज़ादी है या कांग्रेस का डमरू ?



अब तो अन्ना जी ने भी कांग्रेस के खिलाफ प्रचार करने से मना कर दिया है, कांग्रेस जो चाह रही थी वही तो हो रहा है देश में, अभिव्यक्ति की आज़ादी को तो  कांग्रेस ने अपना  डमरू समझ लिया है जब चाहे बजाओ, लेकिन ऐसा कब तक चलेगा,आखिर कब तक खोकले लोकतंत्र के सहारे जीते रहेंगे ओर जिंदा रहेंगे...क्या इसका कोई विकल्प है 
सोशल नेटवर्किंग पर बैन की बात के बाद अब उसका असर होता दिख रहा है ,कानपुर के युवा कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी की वेबसाइट 'कार्टून अगेंस्ट करप्शन डॉट कॉम’ पर प्रतिबन्ध लगा दिया है,
आखिर ये लोग हमारे बोलने , लिखने की आज़ादी के पीछे क्यों पड़े हुए है, - तस्वीर देखें -  

-------
मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक स्थानीय वकील की शिकायत पर कानपुर के युवा कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी की वेबसाइट 'कार्टून अगेंस्ट करप्शन डॉट कॉम’ पर प्रतिबन्ध लगा दिया है।असीम पर आरोप है कि उन्होंने अपने कार्टूनों के जरिए देश की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है। मैंने असीम त्रिवेदी के भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम वाले कार्टून देखें हैं,वे भ्रष्टाचार पर तीखी और सीधी चोट करते है। उनमे किसी का मजाक नही बल्कि आम आदमी की भावनाओं की,गुस्से की वास्तविक अभिव्यक्ति है। मेरी निगाह में यह सिर्फ कार्टूनिस्ट पर प्रतिबन्ध लगाना नहीं बल्कि मीडिया और सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर सुनियोजित तरीके से नियन्त्रण की शुरुआत है। 
आखिर कोई किस आधार पर किसी वेबसाइट,लेख,नाटक,पैन्टिग या किताब पर प्रतिबन्ध लगा सकता है? सच कहना क्या कोई अपराध है? हमारे नेता या सरकार इतनी कमजोर या डरपोक क्यो है? वे असलियत से क्यो डरते है? हमारे बोलने की,लिखने की,कहने की आजादी पर रोक क्यो लगाना चाहते है ? ये केवल अभिव्यक्ति की आज़ादी का सवाल नही है, ये केवल लोकतान्त्रिक हको का हनन भर भी नही है, बल्कि ये एक चुनोती है, असल मे ये हमारे संवैधानिक अधिकारो पर सीधा हमला है। 
असीम का आरोप है कि वेबसाइट को बैन करने की भी मुंबई पुलिस ने कोई जानकारी उन्हे नहीं दी।वेबसाइट की प्रोवाइडर कंपनी बिगरॉक्स.कॉम ने एक मेल द्वारा असीम को साइट बंद करने की सूचना दी। जब बिगरॉक्स कंपनी से बात हुई तो उन्होने असीम को मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच से संपर्क करने को कहा। क्राइम ब्रांच मे कोई बताने वाला नही कि वेबसाइट को बैन क्यो किया गया? या साइबर एक्ट की किन धाराओं में केस दर्ज किया गया है? अब पता चला है कि महाराष्ट्र के बीड़ जिला अदालत ने स्थानीय पुलिस को असीम पर राष्ट्रद्रोह का केस दर्ज करने का आदेश भी दे दिया है। ये और भी शर्मनाक हरकत है। 
आरोप है कि उनके कार्टूनो मे संविधान और संसद का मजाक उडाया गया है। पर सवाल ये भी है कि जब सांसद संसद में हन्गामा करते है,खुलेआम नोट लहराते है,लोकपाल बिल फाडते हैं,चुटकुलेबाजी करते है तब क्या वे संसद का मजाक नही उडाते? देश की जनता का अपमान नहीं करते? 
मैं असीम त्रिवेदी को आश्वस्त करना चाहता हूँ कि वह अकेले नहीं हैं। सरकार की इस गैरलोकतांत्रिक कारवाई के खिलाफ,हम सब उनके साथ खड़े है ।