तेरी आवाज
यूहीं दबा दी गयी
तू कुछ कर ना सका
इसलिए किसी ने तेरे लिए कुछ ना किया
कल कोई 'अपने' लिए तरसेगा
क्योंकि 'अपने' लिए भी कोई कुछ ना करेगा
जो कर सकते थे
वो लोग मजबूर हो गए
या बेसर्मी का लिबास ओढ़ लिया
एक दिन तमाशा हर तरफ होगा
आग हर जगह लगेगी
पर पानी गेरने वाला कोई नही मिलेगा
तेरे जीवन से तांडव नुमा खेल कर दिया
कुछ तो बात थी
जो तुझपे बेवजह का सितम ढा दिया
तुने खुद अपनी आवाज ना उठाई ,
आज हमें अपनी बेसरमी पे अफ़सोस होता है
की हम भी कुछ कर न सके,
और तेरी आवाज यूँही दबा दी गयी
पर कब तक, एक दिन तो आएगा , तेरी भी तूती बोलेगी , बेसर्मो के मुंह से लिबास उठेगा और हर तरफ तेरी ही आवाज गूंजेगी..
( एक मित्र को समर्पित ये कुछ लाईने, जिसके लिए मैं कुछ कर ना सका और आज अफ़सोस होता है की मैं कुछ करने लायक ही नही था )
