Saturday, August 15, 2009

स्वतंत्रता दिवस - गुलामी की बेड़ियों को तोड़ कर नए क्षितिज में प्रवेश


आज स्वतंत्रता दिवस है। वह पवित्र दिन, जब भारत ने गुलामी की बेड़ियों को तोड़ कर नए क्षितिज में प्रवेश किया था। इस अवसर पर कुछ सवालों के जरिए टटोला सेलेब्रिटीज के दिल में बसे भारत को-


यह थे प्रश्न]
1. भारत की आजादी के 62 सालों में आपकी नजर में विशिष्ट परिवर्तनकारी कदम क्या रहा है?
2. विदेश यात्रा के दौरान भारत के बारे में पूछा जाने वाला सबसे जटिल अथवा मुश्किल सवाल क्या होता है?
3. यदि आपको वरीयता दी जाए तो क्या बेहतर जीवन के लिए आप देश छोड़ देंगे? आप कहाँ रहना चाहेंगे और क्यों?
4. आपको किस भारतीय पर सर्वाधिक गर्व होता है?
5. आपकी नजर में किस फिल्म या गीत में भारत को बेहतर ढंग से परिभाषित किया गया है?
6. यदि आपको तीन चीजों को नियंत्रित करने का अवसर मिले तो किसे चुनेंगे?
[देश को तरसते हैं एनआरआई]
* देश की चतुर्दिक तरक्की हुई है। शिक्षा, आजीविका, जीवनशैली एवं व्यापार व प्रौद्योगिकी में हमने काफी प्रगति दर्ज की है। इन सभी क्षेद्दों में महिलाओं की भागीदारी एक बड़ा परिवर्तनकारी कदम है। मुझे गर्व होता है अपने देश की शिक्षा पर, जिसकी बदौलत हमारे देश के डॉक्टर और इंजीनियर पूरी दुनिया में धूम मचा रहे हैं।
* भारत के बारे में विदेशी यह सवाल अक्सर पूछते हैं कि अलग-अलग भाषा और मजहब के लोग एक साथ कैसे रह पाते हैं? तब मुझे यह कहना पड़ता है कि इसका जवाब यहां रह कर ही मिल सकता है। इसे समझा पाना संभव नहीं है।
* जो लोग देश छोड़कर बाहर रहते हैं, मुझे उनकी मानसिकता पर बड़ा क्षोभ होता है । अपने कार्यक्रमों के दौरान विदेशों में हमने अनेक भारतीय परिवारों को सुसज्जिात घरों में ऐशो-आराम से रहने के बावजूद भारत के लिए रोते देखा है।
* जिस भारतीय पर गर्व है वह हैं सचिन तेंदुलकर। वह राष्ट्र को सर्वोपरि रखकर खेलते हैं। मुझे वह घटना याद आती है जब पिता के निधन के बाद भी वह मैदान में आकर खेले थे।
* आनंदमठ में गाया गया बंकिमचंद्र चटर्जी का लिखा गीत वंदे मातरम्।
* मैं जिन तीन चीजों को चुनूंगी वह हैं जनसंख्या पर नियंद्दण, आर्थिक खाई को पाटने का प्रयत्न, राजनीति में अशिक्षित एवं अपराधी के आने पर पूर्ण प्रतिबंध।
[मालिनी अवस्थी: शास्द्दीय एवं लोकगायिका]
[बड़ी बात है झंडे पर सबका हक]
* पहले केवल 15 अगस्त या 26 जनवरी को ही राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाता था, वहीं अब साल के 365 दिन इसे फहराते हुए देखा जा सकता है। पहले कुछ गणमान्य लोगों को प्रतिष्ठानों, कार्यालयों पर ध्वज फहराने का अधिकार था, लेकिन अब आम आदमी भी अपने घर, प्रतिष्ठान, फैक्ट्री, स्कूल, होटल व निजी भवन पर राष्ट्रीय ध्वज फहरा सकता है। इससे बड़ा परिवर्तनकारी कदम मेरी समझ में और कोई नहीं है, क्योंकि देश के प्रति प्रेम और कत्र्ताव्य की भावना ही किसी देश के विकास की रीढ़ होती है। लोगों के रहने का स्तर न केवल महानगरों में ऊपर उठा है, बल्कि देश के गांव-गांव में हर आदमी को मौलिक व भौतिक सुविधाएं दी जा रही है। गांवों को शहरों से जोड़ती पक्की सड़कें, लोगों की आर्थिक उन्नति के प्रति जागरुकता, शिक्षा के प्रति सजगता, देश के हर कोने में यातायात के सर्वोत्ताम साधन, जैसे रेल, हवाई जहाज, बस सेवा एवं सड़कों पर दौड़ती मोटर-कारे, मोबाइल फोन का प्रयोग, देश के विकास को दर्शाता है। हाल ही में हुआ परमाणु समझौता निश्चित रूप से भारत में विकास की एक नई क्रांति लाएगा।
* नहीं, मैं किसी भी दशा में अपने देश को नहीं छोड़ना चाहती। मुझे अपने देश पर गर्व है और मैं अपना जीवन देश और समाज की उन्नति के लिए ही समर्पित करना चाहती हूं।
* मुझे गर्व है भारत रत्न पूर्व राष्ट्रपति ए.पी.जे. अब्दुल कलाम पर। उन्हीं के कारण भारत को पूरे विश्व में परमाणु शक्ति की पहचान मिली है।
* मेरी निगाह में दो फिल्में और उनके गीत हैं। पहली पूरब और पश्चिम जिसका गीत है प्रीत जहां की रीत सदा तथा दूसरी है फिल्म उपकार जिसका गीत मेरे देश की धरती सोना उगले, उगले हीरे मोती भारत को बेहतर ढंग से परिभाषित करता है।
* भ्रष्टाचार, जातिवाद और रुढि़वाद देश के विकास के लिए सबसे बड़ी बाधाएं है। इनपर प्रतिबंध तो लगाया गया है, लेकिन यह आज भी व्यापक रूप से समाज में व्याप्त है। इनको जड़ से उखाड़ना चाहिए।
[शालू जिंदल: कुचिपुड़ी नृत्यांगना एवं समाजसेवी]
[पूर्वाग्रह छोड़ें विदेशी]
* आज टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में हम तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। हर जगह घर की छतों पर डिश एंटेना और लोगों के हाथों में मोबाइल दिखते हैं। मुझे अपने देश के चौतरफा विकास पर गर्व होता है।
* विदेशों में अभी तक लोग मानते हैं कि भारत सांप व बंदर का देश है और सड़कों पर गाय घूमती रहती है। वे हमारी परंपरा को पिछड़ेपन और अंधविश्वास का नाम देते हैं। वे नहीं समझ पाते कि यह हमारी आस्था से जुड़ा है। मुझे लगता है कि भारत सरकार को देश की प्रगति और विकास का धुआंधार प्रचार करना चाहिए।
* दुनिया की सैर करना जरूरी है। उससे हमें जानकारी मिलती है कि और देशों में क्या हो रहा है? अगर हमारी फिल्में विदेशों में चलें और वहां से धन मिले, तो खुशी होगी, लेकिन तन और मन से मैं हमेशा भारत में रहना चाहूंगा।
* किसी भारतीय पर गर्व करने या उसका नाम लेने की बात करें, तो मैं एक से अधिक नामों का उल्लेख करना चाहूंगा। महाराणा प्रताप, शिवाजी, सुभाषचंद्र बोस, वीर सावरकर आदि इन सभी के बगैर हम आजादी की सांस नहीं ले पाते। आजादी के बाद की हस्तियों में अभी इंदिरा गांधी याद आ रही हैं।
* मनोज कुमार की फिल्म पूरब और पश्चिम का गाना 'जब जीरो दिया मेरे भारत ने ़ ़ ़' भारत के गौरव का समुचित गान करता है।* अगर देश में किसी व्यवहार और प्रवृत्तिपर पाबंदी लगाने का अधिकार मिले, तो मैं सबसे पहले गर्भ परीक्षण पर पाबंदी लगा दूं। बालिकाओं की भ्रूण हत्या चिंताजनक है। दूसरी पाबंदी सांप्रदायिक दंगों पर लगाऊंगा। तीसरी, कानूनी भेद-भाव खत्म करना चाहूंगा। सभी को समान अधिकार और सुविधा मिले।
[मधुर भंडारकर: फिल्म निर्देशक]
[गर्व है भारतीय होने पर]
* देश ने टेक्नोलॅाजी, साइंस, डिजाइन, फिल्म, मशीनरी, इंजीनियरिंग और आईटी में विशेष उपलब्धि पाई है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यहां यंग पॉपुलेशन भी विश्व में सबसे अधिक है। यह दुनिया का सबसे बड़ा प्रजातांत्रिक देश है।
* जब भी मैं बाहर जाता हूं, तो लोग यकीन नहीं करते कि मैं भारतीय हूं। जब मैं उन्हें यकीन दिलाता हूं, तो उन्हें हैरत होती है। वे अक्सर सवाल करते हैं कि आप कैसे इतनी अच्छी अंग्रेजी बोलते हैं?
* मैं अभी तक 22-23 देशों में घूम चुका हूं। मुझे अपने भारतीय होने पर बहुत गर्व है, क्योंकि हम लोग अब भी अपनी पारंपरिक संस्कृति को नहीं भूले हैं। हम आधुनिक होते हुए भी परंपराओं का लिहाज करते हैं।
* मुझे अपना वतन ही प्यारा है। मैं अपना देश किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ सकता हूं। फिर भी अगर किसी दूसरी जगह जाना ही पड़े, तो मैं जापान जाना अधिक पसंद करूंगा। यदि हम लोग जापानियों से सीख लें, तो हम भी नंबर वन बन सकते हैं। जापानियों में आज भी इंसानियत है। यह कहना गलत नहीं होगा कि वहां आज भी रामराज्य है।
* फिल्म पूरब और पश्चिम का गाना, मेरे देश की धरती सोना उगले, उगले हीरे-मोती.. इस गाने में भारत को बेहतर ढंग से परिभाषित किया गया है।
* अगर मुझे नियंत्रित करने का अवसर मिले, तो मैं सबसे पहले भ्रष्टाचार, भुखमरी और निरक्षरता पर अंकुश लगाऊंगा।
[जतिन कोचर: फैशन डिजाइनर]
[यहीं लूंगी आखिरी सांस]
* आजादी के बाद देश में भौतिक समृद्घि बढ़ी है, आर्थिक विकास हुआ है, लेकिन इस परिवर्तन की गति बहुत धीमी है। इसमें सुधार की आवश्यकता है। आई.आई.टी. जैसे तकनीकी संस्थानों की संख्या बढ़ रही है। महिलाओं की हर क्षेत्र में भागीदारी बढ़ी है।
* आजाद हिंद फौज में शामिल होने के बाद मैंने कभी विदेश यात्रा नहीं की। हाँ, लोगों से सुना जरूर है कि आज भी भारतीय अपमानित किये जाते हैं। इसके पीछे भी दोष हमारी लचर राजनीति और सरकार का है।
* मेरा जन्म ही विदेश में हुआ था। नेताजी सुभाषचंद्र बोस के साथ जुड़ने के बाद मैं भारतीय हो गई। मेरी वरीयता में आजादी थी। वह मिल गई। स्वतंत्र राष्ट्र में सांस ले रही हूं। यहीं अंतिम सांस लूंगी। विदेश में बसने के बारे में कभी सपने में भी नहीं सोचा।
* मुझे जिस भारतीय पर सबसे अधिक गर्व होता है वह हैं नेताजी सुभाष चंद्र बोस। उन जैसा व्यक्तित्व भारत में दूसरा नहीं हुआ। वे आजादी के सिपाही थे जिन्हें, अधिकारों की लड़ाई लड़ने की आध्यात्मिक समझ थी। उनकी सूझबूझ का विदेशी भी लोहा मानते हैं।
* उपकार फिल्म का गाना मेरे देश की धरती सोना उगले, उगले हीरे मोती भारत की शान को इंगित करता है।
* नशा, भ्रष्टाचार और जातिगत आरक्षण वर्तमान में देश की सबसे बड़ी समस्याएं हैं।
[मानवती आय्र्या: स्वतंत्रता संग्राम सेनानी]
[कहां मिलेगी ऐसी संस्कृति]
* अन्नक्षेद्द में और सुरक्षा के क्षेद्द में आत्मनिर्भरता। आज हम परमाणु हथियार संपन्न राष्ट्र हैं, लेकिन यह सिर्फ आत्मरक्षा के लिए है। इससे किसी को डर नहीं लगता, क्योंकि सब जानते हैं कि भारत एक शांतिप्रिय देश है। यह तब तक दूसरों पर हमला नहीं करेगा, जब तक दूसरे इससे छेड़छाड़ न करें। परमाणु ऊर्जा के क्षेद्द में हमारी आत्मनिर्भरता एवं विकास के कार्यो के लिए उसका उपयोग होता देख हमें अपने देश पर गर्व होता है।
* विदेशों में भारत के बारे में पूछा जानेवाला सबसे जटिल प्रश्न यह है कि संस्कृति और संस्कारों से धनी देश इतना निर्धन क्यों है?
* मैं अपना देश बिल्कुल नहीं छोड़ना चाहूंगा। इसके दो कारण हैं-पहला, मेरा देश मेरे लोगों का देश है जिनसे मैं बिछड़ना बिल्कुल नहीं चाहूंगा। दूसरा, हमें अपने देश जैसी संयुक्त परिवार की संस्कृति कहीं और नहीं मिलेगी।
* जिस भारतीय पर मुझे सर्वाधिक गर्व होता है वह हैं सरदार वल्लभभाई पटेल ।
* मेरी दृष्टि में पूरब-पश्चिम फिल्म का गाना है प्रीत जहां की रीत सदा , मैं गीत वहीं के गाता हूं में भारत को बेहतर ढंग से परिभाषित किया गया है।
* मैं जिन तीन चीजों को नियंत्रित करना चाहूंगा वह हैं आबादी, धर्म के नाम पर राजनीति एवं सांप्रदायिक भावना फैलानेपर।
[उज्जवल निकम: 37 आतंकियों को मृत्युदंड की सजा सुनवा चुके विशेष सरकारी वकील]



श्याम tyagi


Friday, July 31, 2009

करियर - इंडस्ट्री में एक अलग मुकाम


वक्त के साथ इंडस्ट्री की डिमांड बदली है और स्टूडेंट्स की च्वाइस भी। स्टूडेंट अब कुछ ऐसा नया करना चाहते हैं, जिससे वे इंडस्ट्री में एक अलग मुकाम बना सकें। इस अंक में हम कुछ ऐसे ही नए कोर्सो के बारे में पडताल कर रहे हैं, जिनमें आने वाले दिनों में अच्छी संभावनाएं देखी जा रही हैं। जैव विविधता
ग्लोबल वार्मिग पूरे विश्व के लिए गंभीर समस्या बन गई है। इसकी वजह से जीव-जंतुओं की कई प्रजातियां विलुप्त होने की कगार पर पहुंच गई हैं। इसीलिए अब कनजर्वेस्टनिस्ट की मांग जोर पकड रही है। गुरु गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी ने बायो डायवर्सिटी ऐंड कनजर्वेशन में मास्टर प्रोग्राम लॉन्च किया है। इसमें थ्योरी के साथ-साथ प्रैक्टिकल पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। इस फील्ड में आने के लिए जैव विविधता की अच्छी जानकारी जरूरी है, जैसे-बायो डायवर्सिटी यानी जैव विविधता के बारे में मूल्याकंन, साइट सर्वे, साइट मैनेजमेंट, जिओ इन्फॉर्मेंटिक सिस्टम आदि। प्रोग्राम खत्म करने के बाद रोजगार के लिए इंटरनेशनल एनजीओ, व‌र्ल्ड वाइल्डलाइफ फंड और नेशनल वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन ग्रुप में कोशिश कर सकते हैं। इसके अलावा, मिनिस्ट्री ऑफ एनवायरनमेंट ऐंड फॉरेस्ट ऐंड एडवाइजरी बोर्ड में भी नौकरी की अच्छी संभावनाएं हैं। आवेदन करने के लिए बीएससी में कम से कम 50 प्रतिशत अंक होने चाहिए। एंट्री प्रवेश परीक्षा के आधार पर होती है।
फैशन स्टाइलिंग
फैशन स्टाइलिंग से जुडे पेशवर एक असाइनमेंट के लिए करीब 15 से 20 हजार रुपये तक लेते हैं। भारत के लिए फैशन स्टाइलिंग का कॉन्सेप्ट नया है, लेकिन अब फैशन के प्रति लोगों के बढते क्रेज की वजह से इस फील्ड में काफी स्कोप हैं। यदि आप लोगों को स्टाइलिश बनाने का हुनर रखते हैं, तो फैशन स्टाइलिंग में काफी अच्छा करियर हो सकता है। इस फील्ड में सफलता इस बात पर भी निर्भर करती है कि आप खुद की मार्केटिंग किस तरह से कर पाते हैं! साथ ही, फैशन व‌र्ल्ड के नए ट्रेंड की जानकारी भी जरूरी है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी या इससे संबद्ध प्राइवेट संस्थानों में संबंधित कोर्स उपलब्ध हैं। कोर्स में मेकअप नॉलेज, हेयर स्टाइल, फोटोग्राफी, कम्प्यूटर और आईटी ऐप्लिकेशन के बारे में जानकारी दी जाती है। एंट्री के लिए 12वीं पास होना जरूरी है। कोर्स पूरा करने के बाद फैशन हाउस, एड फिल्म, फिल्म इंडस्ट्री, इवेंट मैनेजमेंट कंपनी आदि में रोजगार की तलाश कर सकते हैं।
हेल्थ मैनेजमेंट
प्राइसवाटरहाउसकूपर्स के मुताबिक हेल्थकेयर सेक्टर का आकार वर्ष 2010 तक 40 बिलियन डॉलर यानी 40 अरब डॉलर के आंकडे को पार कर सकता है। वहीं मैकिंजे-सीआईआई की एक रिपोर्ट के अनुसार, मेडिकल टूरिज्म का मार्केट भी वर्ष 2012 तक दो अरब डॉलर का हो जाएगा। जब हेल्थकेयर इंडस्ट्री इतनी तेजी से बढ रही है, तो ट्रेंड प्रोफेशनल्स की जरूरत पडेगी ही। यदि आप एमबीए इन हेल्थकेयर मैनेजमेंट करना चाहते हैं, तो इस कोर्स के अंतर्गत पहले साल में मैनेजमेंट स्किल, हेल्थकेयर लॉ और रेगुलेशन के बारे में पढाया जाता है, जबकि सेकेंड ईयर में हॉस्पिटल ऑपरेशन मैनेजमेंट या मेडिकल टूरिज्म आदि में स्पेशलाइजेशन कर सकते हैं। प्लेसमेंट की बात करें, तो कोर्स पूरा करने के बाद हेल्थकेयर एग्जीक्यूटिव के तौर पर हॉस्पिटल, हॉस्पिटल ऑर्किटेक्चर फर्म में एडवाइजर, मेडिकल सुपरिटेंडेंट, चीफ मेडिकल ऑफिसर, ट्रैवल इंडस्ट्री में कंसल्टेंट आदि के रूप में करियर की शुरुआत कर सकते हैं। मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से साइंस, फार्मेसी और मेडिसिन में स्नातक की डिग्री रखने वाले स्टूडेंट्स इस कोर्स में एंट्री ले सकते हैं। यहां सैलरी भी काफी अच्छी है। एंट्री लेवल सैलरी 15 से 20 हजार रुपये के करीब होती है।
इंडस्ट्रियल एरिया प्लानिंग
देश की इंडस्ट्रीज के विकास के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं। इसमें स्पेशल इकोनॉमिक जोन, स्पेशल इन्वेस्टमेंट रीजन और इंडस्ट्रियल टाउनशिप भी शामिल हैं। यही वजह है कि इंडस्ट्रियल एरिया मैनेजमेंट और प्लानिंग आज इंडस्ट्री की जरूरत बन गई है। पेशेवरों की बढती हुई डिमांड को देखते हुए इंडस्ट्रियल एरिया प्लानिंग ऐंड मैनेजमेंट में एमटेक कोर्स की शुरुआत की गई है। इससे जुडे स्टूडेंट्स इंडस्ट्रियल एरिया के प्लानिंग, डिजाइनिंग, डेवलपमेंट और मैनेजमेंट के क्षेत्र में काम करते हैं। जहां तक जॉब की बात है, तो गवर्नमेंट डिपार्टमेंट के साथ-साथ एनजीओ, रिसर्च ऐंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन, कंसल्टेंसी ऑर्गनाइजेशन आदि में संभावनाएं हैं। इस कोर्स में प्रवेश के लिए ऑर्किटेक्चर/ सिविल इंजीनियरिंग/ प्लानिंग में बैचलर डिग्री या फिर जिओग्रफी /इकोनॉमिक्स/सोशयोलॉजी में मास्टर डिग्री रखने वाले स्टूडेंट्स आवेदन कर सकते हैं।
डाटा स्टोरेज
इंडस्ट्री में आज ऐसे लोगों की कमी महसूस की जा रही हैं, जो डेटाज को सही तरीके से मैनेज कर सकें। इसी बात को ध्यान में रखते हुए स्टोरेज नेटवर्किंग इंडस्ट्री एसोसिएशन ने ट्रेनिंग प्रोग्राम ऑफर किया है। इस कोर्स में एंट्री के लिए आईटी की बेसिक जानकारी के साथ-साथ आईटी कंपनी में कम से कम छह महीने तक काम करने का एक्सपीरियंस जरूरी है। डाटा स्टोरेज पेशेवर की शुरुआती सैलरी 10 से 12 हजार रुपये तक होती है।
क्लीनिकल रिसर्च
मैकिंजे की एक रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2013 तक क्लीनिकल रिसर्च के क्षेत्र में 50 हजार पेशेवर लोगों की जरूरत होगी। इतना ही नहीं, ग्लोबल फार्मा कंपनियों का रुख भारत की तरफ होने से इस क्षेत्र में स्कोप काफी बढ गया है। कुछ इंस्टीट्यूट्स ने क्लीनिकल रिसर्च से जुडे कोर्स की शुरुआत की है। एमबीबीएस, बीडीएस, बीएएमएस, बीएचएम, बीई, बी टेक, बीफार्मा, बीएससी नर्सिग आदि की डिग्री रखने वाले स्टूडेंट्स क्लीनिकल रिसर्च से जुडे कोर्स में एडमिशन ले सकते हैं।
पब्लिक मैनेजमेंट
यदि आप चाहें, तो पब्लिक मैनेजमेंट ऐंड पॉलिसी में पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स कर सकते हैं। इसमें गवर्नेंस, पॉलिसी, क्रियान्वयन, इन्फ्रॉस्ट्रक्चर डेवलपमेंट और पब्लिक एंटरप्राइज मैनेजमेंट पर फोकस किया गया है। किसी भी विषय से स्नातक करने वाले छात्र इस कोर्स के लिए आवेदन कर सकते हैं। आवेदन करने वाले स्टूडेंट्स की उम्र 27 वर्ष से कम नहीं होनी चाहिए। कोर्स पूरा करने के बाद पब्लिक सेक्टर के साथ-साथ प्राइवेट सेक्टर की कंपनियों में जॉब की तलाश कर सकते हैं। प्राइवेट कंपनियों की बात करें, तो अर्नेस्ट यंग, मैकिंजे, जीएमआर और रिलायंस जैसी कंपनियों में भी अच्छा मौका है।
डेवलपमेंट फाइनेंस अगर आप इस क्षेत्र में आना चाहते हैं, तो पोस्ट-ग्रेजुएट डिप्लोमा इन मैनेजमेंट डेवलपमेंट ऐंड सस्टेनबल फाइनेंस कोर्स कर सकते हैं। कोर्स में एडमिशन लेने के लिए 10वीं, 12वीं और ग्रेजुएशन में फ‌र्स्ट डिवीजन होना जरूरी है। इसके अलावा, कैट स्कोर में कम से कम 85 प्रतिशत अंक होने पर ही एडमिशन के लिए विचार किया जा सकता है। जहां तक प्लेसमेंट की बात है, तो एनजीओ, डेवलपमेंट कंपनी, बैंक आदि में नौकरियां मिल सकती हैं।
मेट्रो टेक्नोलॉजी
इस समय मेट्रो का विस्तार देश के कई प्रमुख शहरों में हो रहा है। यही वजह है कि मेट्रो टेक्नोलॉजी में पेशेवर लोगों की मांग बढ गई है। इसी को ध्यान में रखते हुए आईआईटी, दिल्ली और दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने एक समझौता किया है। जिसके तहत पेशेवर लोगों को मेट्रो टेक्नोलॉजी में ट्रेंड किया जाएगा। यह एक साल का प्रोग्राम है। इसमें 12 कोर्स हैं। एक्सपर्ट के मुताबिक इस समय देश में कंस्ट्रक्शन और मेट्रो रेल सिस्टम के ऑपरेशन से जुडे ट्रेंड लोगों की काफी कमी है। बीटेक या फिर बीआर्क की डिग्री रखने वाले स्टूडेंट्स इस कोर्स में एडमिशन ले सकते हैं।
पैकेजिंग और प्रिंटिंग
जो दिखता है, वही बिकता है। यह बात पैकेजिंग और प्रिंटिंग इंडस्ट्री पर भी लागू है। जिस प्रोडक्ट की पैकेजिंग जितनी अच्छी होती है, ग्राहक की नजर में वह उतनी ही जल्द चढ जाता है। इन दिनों भारत में पैकेजिंग इंडस्ट्री रफ्तार पकड रही है। इसीलिए पैकेजिंग से जुडे लोगों की मांग भी बढ रही है। यदि आप इस क्षेत्र में आना चाहते हैं, तो आपके लिए सर्टिफिकेट प्रोग्राम इन पैकेजिंग, पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा, एग्जीक्यूटिव डेवलपमेंट प्रोग्राम आदि कोर्स उपलब्ध हैं। इसमें पैकेजिंग डिजाइन ऐंड डेवलपमेंट, प्रिंटिंग और पैकेजिंग मशीन, क्वालिटी कंट्रोल पर अधिक जोर दिया जाता है। कोर्स खत्म करने के बाद एफएमसीजी कंपनी, एक्सपोर्ट हाउस और पि्रंटिंग कंपनी में काम कर सकते हैं। 12वीं और ग्रेजुएशन के बाद इस कोर्स में एडमिशन ले सकते हैं।
(परवीन मल्होत्रा, अनिल सेठी से बातचीत पर आधारित)
.imr007@gmail.com

पर्दे पर चित्रित प्यार के बदलते अंदाज



प्यार अब अमू‌र्त्त एहसास नहीं रह गया है। खासकर हिंदी फिल्मों को देखते हुए पर्दे पर चित्रित प्यार के बदलते अंदाज के मद्देनजर इसे रेखांकित किया जा सकता है। इश्क के कमीना और कमबख्त होने जैसे जुमलों से परहेज करने पर भी मानना होगा कि इन दिनों पर्दे पर चल रहा रोमांस और प्यार पहले की अपेक्षा शारीरिक और दिखावटी हो गया है। फिल्म की तस्वीरें देख लें, हीरो-हीरोइन प्रेम और आलिंगन की सुविधाजनक मुद्राओं में नजर आते हैं। दर्शक को आकर्षित करने के लिए बनाए गए पोस्टर और प्रोमो पहले मर्यादित होते थे। पर्दे पर चित्रित रोमांस अब आक्रामक और चिपकाऊ हो चुका है। उसके एहसास को अब रूह से महसूस करने की जरूरत नहीं है। पिछले दिनों आई कमबख्त इश्क के संवाद की तीखी आलोचना हुई। यहां तक कि मुख्य भूमिका निभा रहे करीना कपूर और अक्षय कुमार को भी लोगों ने नहीं बख्शा, लेकिन सच यही है कि कमबख्त इश्क की जमीन पिछले दस साल में तैयार हुई है। दर्शक का एक समूह प्यार के इस प्रदर्शन पर वाह-वाह करता है। वह हीरो-हीरोइन के बोले संवाद को अपने रिंगटोन के रूप में इस्तेमाल करता है। वही ऐसी फिल्मों को हिट कराता है।
हिंदी फिल्मों की यह शैलीगत विशेषता है कि हर फिल्म में एक प्रेम कहानी चलती है। फिल्म का विषय कुछ भी हो। उसमें हीरो-हीरोइन का रोमांस होता ही है। हां, फिल्म के थीम के अनुसार कभी रोमांस पृष्ठभूमि या हाशिए पर हो सकता है, लेकिन ऐसा नहीं हो सकता कि रोमांस के दृश्य बिल्कुल न हों। युवा निर्देशक प्रेम कहानी की इस अनिवार्यता की मुश्किलों की बातें करने लगे हैं। संभव है अगले कुछ वर्षो में रोमांस दरकिनार हो जाए, लेकिन अभी रोमांस हिंदी फिल्मों का प्रमुख मसाला है और रहेगा। ऐक्शन, थ्रिलर, कॉमेडी जैसी विधाओं की फिल्मों में भी हीरो-हीरोइन रोमांस के क्षण निकाल ही लेते हैं। दर्शकों की रुचि का खयाल रखते हुए उन्हें यह मौका फिल्म के लेखक और निर्देशक देते हैं।
याद करें, तो पहले की फिल्मों में हीरो-हीरोइन की पहली मुलाकात और प्यार के एहसास में वक्त लगता था। उस प्यार को कुबूल करने या इजहार करने में और भी ज्यादा वक्त लगता था। आजादी के आसपास ऐसी फिल्में बनीं, जिनमें प्यार का इजहार नहीं दिखा। तब अधूरे प्यार की दास्तान दर्शकों को अधिक प्रभावित करती थी। इंतजार और चाहत का सुरूर दर्शकों को नशा देता था। ज्यादातर क्लासिक प्रेम-कहानियों में हीरो-हीरोइन मिल ही नहीं पाते थे। फिर ऐसा दौर आया, जब माता-पिता और समाज प्यार के दुश्मन बन गए। प्यार जैसे स्वाभाविक और मानवीय भाव की अभिव्यक्ति और स्वीकृति में कई अड़चनें आई। आंखों ही आंखों में हुए इशारे से लेकर शादी के मंडप के सात फेरों के बीच ही कहानी चलती रही। अंत में हीरो-हीरोइन के मिलने के बाद ही पर्दे पर द एंड शब्द आ जाते थे, जो आज की फिल्मों में नहीं दिखता।
उसकी एक वजह हो सकती है कि अब प्रेम कहानी से ज्यादा जोर प्रेम-प्रसंग पर रहता है। हीरो-हीरोइन के बीच मुलाकात, भिड़ंत, मोहब्बत और नफरत के सीन होते हैं। पहले की फिल्मों की तरह हीरो-हीरोइन महज आशिक नहीं होते। जिंदगी के रोजगार में परेशान आज के प्रेमी रोमांस के हसीन पल की चाहत में इतने उतावले होते हैं कि मिलते ही आलिंगन और चुंबनों की बौछार कर देते हैं। पिछले दस वर्षो में आई फिल्मों पर गौर करें, तो पाएंगे कि कुछ ही फिल्मों की हीरोइन या हीरो के चेहरे याद हैं। प्यार के चित्रण में गहराई नहीं होने के कारण हमें आज के स्टार प्रेमी या प्रेमिका के रूप में याद नहीं रहते। उनकी कोई छवि दर्शकों के दिमाग में नहीं बैठती। प्रेम कहानियों के इस देश में दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे के बाद जब वी मेट ही पॉपुलर लव स्टोरी के रूप में याद आती है। कहते हैं आधुनिक जिंदगी की आपाधापी में हमारे पास रोमांस के लिए वक्त नहीं है। हमारा रोमांस संबंधों को निभाने तक ही सीमित रह गया है। वास्तविक जिंदगी में रोमांटिक व्यक्तियों को अनरिअल माना जाता है। इसके साथ ही प्यार की अभिव्यक्ति और प्रदर्शन के तरीके बदल गए हैं। हमारे पास सब कुछ तेजी से घट रहा है। संवाद और संप्रेषण के नए माध्यम हमारी जिंदगी के हिस्से बन गए हैं। हम एमएमएस और चैट में अपने भाव और एक्सप्रेशन के लिए स्माइली इस्तेमाल करने लगे हैं। सिर्फ आई लव यू या एलओएल (लॉट्स ऑफ लव) लिखने से भाव व्यक्त नहीं हो पाते। इस बारे में बात होती है सैफ अली खान से। वे कहते हैं कि मुझे नहीं लगता कि पर्दे पर प्यार का एहसास बदला है। समाज में जितनी तेजी से परिव‌र्त्तन आया है, पर्दे पर वह तेजी नहीं दिखाई पड़ती। पहले वक्त ज्यादा था और प्यार के बीच मुश्किलें भी थीं, इसलिए उसकी कामयाबी में रोमांच और रोमानी एहसास रहता था। आज भी उस रोमांस को हम महसूस करते हैं, लेकिन शायद उसे जाहिर करने में हम ज्यादा फिजिकल हो गए हैं। हम अपनी भावनाओं को पहले की तरह दबाकर या दुनिया से छिपाकर नहीं रख पाते।
इसी बारे में प्रियंका चोपड़ा कहती हैं कि हिंदी फिल्मों में प्यार का चित्रण बदला है। अब यह पहले की तरह नहीं रहा। लोग मानते हैं कि पर्दे पर दिखने वाला प्यार वास्तविक नहीं होता, लेकिन हमारे लेखक जिंदगी और समाज से ही कहानियां लेते हैं। देखें तो हमारा समाज बदल गया है। मैं अभी प्यार इंपॉसिबल कर रही हूं। उसमें एक निहायत सुंदर लड़की से सामान्य लड़का प्रेम करता है। हो सकता है, यह वैसे संभव न लगे, लेकिन ऐसी जोडि़यां हम अपने आसपास देखते हैं। दीपिका पादुकोण भी कहती हैं कि हर नई पीढ़ी के साथ रोमांस बदल जाता है। वह समय की जरूरत और मांग से प्रभावित होता है। मेरी उम्र में उस अंदाज का रोमांस नहीं हो सकता, जो मेरे माता-पिता के समय होता था। फर्क पर्दे पर भी दिखता है।
राज कपूर और रणबीर कपूर के प्यार करने के अंदाज में फर्क तो होगा ही। मुझे लगता है कि प्यार के साथ जो जुड़े होने का भाव है, वह नहीं बदला है। अपने देश में वह बदल भी नहीं सकता!
शाहिद कपूर के बाद सैफ अली खान की प्रेमिका के रूप में चर्चा पाने वाली करीना कपूर कहती हैं कि पहले गुपचुप प्यार होता था। अब समाज में खुलापन आया है, तो वह खुलापन पर्दे पर भी दिख रहा है। मैं तो कहूंगी कि रिअल जिंदगी में रोमांस और प्यार जितना बोल्ड हुआ है, वह पर्दे पर नहीं आया है। जिस प्रकार पर्दे पर हीरोइनों के सुंदर दिखने का नजरिया बदल गया है, उसी प्रकार उनके प्रेम का एक्सप्रेशन भी बदला है। आजकल के युवक थोड़े अग्रेसिव और बोल्ड हो गए हैं। हम पर्दे पर वही बोल्डनेस लाने की कोशिश करते हैं।

Sunday, July 12, 2009

सम्लेंगिकता -- एक घोर अपराध !!!!!

सम्लेंगिकता नयी चीज नहीं है . सदियों से इसका चलन चलता आ रहा है. पर इसे कभी सामाजिक मान्यता नहीं दी गई. यह एक घोर अपराध है. कोई चीज पुराणी होने से स्विकरिया नहीं होती है.मर्डर, रैप, चोरी ये सभी सदियों से चले आ रहे है इसलिए इन्हे मान्यता तो नहीं दी जा सकती . तर्क यह भी दिया जा रहा है ज्यादातर कामयाब लोग सम्लेंगिक है.लेकिन यह एक बेकार सोच है.
भारत में परिवार सबसे बड़ी ओर सफल संस्था है. यह भारतीय परम पारा ,सभ्यता , ओर संकृति का परिचालक है. इसमे सम्लेंगिकता का वायरस घुसना एक षडयंत्र है.
संविधान में नागरिक स्वतंत्रता की बात की गई है.
लेकिन संविधान में साथ ही यह भी कहाँ गया है की मर्यादा ओर लोक परम्परा के विरूद्व कोई भी स्वतंत्रता मान्य नहीं होगी.
संविधान में तो अधिकारों के साथ दयित्यावो का जिक्र बगही किया गया है. सिर्फ़ अधिकारों की बात करे ओर दायित्वों का निर्व्हारण करे, तो यह अपराध होगा !!
सस्त्रो में सम्लेंगिकता का कहीं कोई जीकर नही है. भितिचित्रो के मध्यम से ही इसे कहीं कहीं दिखाया गया है. विवाह से पहले जो भी सम्बन्ध होते है वो सभी अपराध है. यदि इसे बढ़ावा मिलता है तो आगे चलकर बचो का बंटवारा, सम्पति विवाद सहित ऐसे अनेक असाध्य रोग फेलेंगे.
जिसका parinam भयंकर होगा.......
सम्लेगिकता एक संगठित सेक्स अपराध है..सरकार यदि इसे कानून के दायरे में लती है तो इसका रास्ट्रीय इस्टर पर विरोध किया जाएगा.....इस बीमारी से देश के युवाओ को बचने के लिए हम सबको कुछ कुछ करना पड़ेगा,,,,,,,,,,,,,,
shyam tyagi

Wednesday, June 10, 2009

SUMAN BANSAL

Do we have answers to these questions?
Why, What and Who: Who are we?
Why were we born? What are we doing?
What is this life about? Why are we living?
For whom we are living? Are we doing the right thing by living?
What we should be doing, as we are living now?
What is the reason behind this life?
Why do we die? Why are we fighting? Why people fight in the name of religion?
Why don’t we look the same as each other?
Why aren't we on the same level? We are born, live and see others die, but the world keeps moving. Does it make any sense? What is space? What is in outer space? Why are there other planets?
Can we make this world a nice place? Can we make everyone happy?
I believe there is a reason behind our life and our existence. I am not sure, but we should do something important so that we can feel proud of our life. What's happening at the moment? We work all of our lives and save for our children and for our old age, but people say death is the only truth in life. We even don’t know if this world exists after our death. Why don’t we make this life useful by helping each other, and make this world a better place to live?
My aim is to see a smile on every face. My mission is to build hospitals, schools, work places, houses etc., so we can reduce suffering as much as we can. Hopefully, by providing these resources, no one will die because they did not have enough money to afford medical treatment, and no one will go to sleep hungry, and everyone will have access to education. I believe we could do that much or at least we can try! I do not think there is anything to lose, do you?
My wish is to start a charity project, which will bring a change worldwide, but I need your support. Please see My AIM. I would appreciate any support.
FOR MORE INFO
www.earnyourname.net/sumanbansal

Thank you.

Monday, April 13, 2009

Sunny Deol gets bail in over decade-old case

Jaipur, April 10 Bollywood actor Sunny Deol was today granted bail by a railway court here in over a decade-old case of allegedly entering a platform without permission and pulling a train's emergency chain during shooting of a film.In compliance with the Rajasthan High court's order last week, Deol accompanied by his counsel Suresh Sahani, submitted a personal bond of Rs 25000 and two sureties of the same amount in the railway court before Additional Magistrate (Railway), Jaipur, Pooran Chand Sharma, who granted him bail.The High Court had decreed that Deol could be arrested, if he fails to turn up in the court by April 17.Besides Deol, actress Karishma Kapoor, fight master Tinu Verma and Satish Shah were accused in the 1997 incident.They illegally entered the Narena railway station in Ajmer division for shooting the scene of film 'Bajrang' and illegally pulled the chain of a train.According to the complaint, when the train was about to leave the station, unit members pulled the emergency chain and the train had to wait for additional 25 minutes, affecting the service on the sector.

Saturday, April 4, 2009

JINDAGI---ROCKS

ज़िन्दगी है छोटी, हर पल में खुश रहो ...ऑफिस में खुश रहो, घर में खुश रहो

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आज पनीर नहीं है , दाल में ही खुश रहो ...आज जिम जाने का समय नहीं , दो कदम चल के ही खुश रहो ...

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आज दोस्तों का साथ नहीं, टीवी देख के ही खुश रहो ...घर जा नहीं सकते तो फ़ोन कर के ही खुश रहो ...

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आज कोई नाराज़ है, उसके इस अंदाज़ में भी खुश रहो ...जिसे देख नहीं सकते उसकी आवाज़ में ही खुश रहो ...

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जिसे पा नहीं सकते उसकी याद में ही खुश रहोLaptop न मिला तो क्या , Desktop में ही खुश रहो ...

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बिता हुआ कल जा चूका है , उसकी मीठी यादों में ही खुश रहो ...आने वाले पल का पता नहीं ... सपनो में ही खुश रहो ...

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हँसते हँसते ये पल बिताएँगे, आज में ही खुश रहोज़िन्दगी है छोटी, हर पल में खुश रहो