'वो जमाना गया जब हीरो मरता मरता अपने भगवान
से एक बार जीवनदान देने की मांग करता है और भगवान हीरो की सुन लेता है हीरो दोबारा
उठता है और दुश्मनों को खत्म करके अपनी मां बहन इत्यदि को बचा लेता है,
दर्शक तालि बजाते हैं और घर आ जाते है.
अब हीरो लड़ता लड़ता मर जाता है लेकिन भगवान
को बीच में नही लाता, मसलन अपनी लड़ाई खुद लड़ता
है, अब या तो हीरो का भगवान से भरोसा उठ चुका है या बॉलिवु़ड का या फिर हिंदुस्तान
का दर्शक समझदार हो गया, आप कुछ भी दिखाओगे वो ताली बजाएगा ऐसी उम्मीद करना बेमानी
है' ।
मतलब साफ है लोगों की सोच बदली है और यही कारण
है कि सिनेमा बनाने वालों को भी अपनी सोच में बदलाव करना पड़ा ।
आजकल अधिकतर जो फिल्में
बन रही है वो नई कहानियों पर बन रही है निर्माता-निर्देशक
नए नए प्रयोग कर रहें है । फिल्मों के फिल्मांकन का तरिका भी काफि हद तक बदल चुका है
अब ना तो भारी भरकम कैमरा होता है और ना ही लंबी चौड़ी फिल्म युनिट, गिनती के लोग मिलकर एैसा सिनेमा बना देते है जो अंतर्राष्ट्रीय लेवल पर अपनी
पहचान बनाता है । फिल्मकार फिल्म बनाते वक्त सामाजिक मुद्दो को भी साथ लेकर चल रहे
है जो कि सिनेमा के लिए अच्छी बात है,
लेकिन कई बार इंसान जब नए प्रयोग करता है तो
असफल भी हो जाता है फिल्म पिपली लाईव ने प्रयोग किया और हिट हुई । लेकिन जब हम शांधाई
देखते हैं तो वो फिल्म कम ओर फसाद ज्यादा लगती है । दर्शक मनोरंजन के लिए फिल्म देखने
जाता है ना कि अपने दिमाग का दिवालिया करने के लिए, शांघाई ने लोगो को सोचने पर मजबूर
कर दिया कि कोई कैसे ऐसी भटकाऊ फिल्म भी बना
सकता है जिसकी ना कहानी का अता-पता हो और ना ही कलाईमैक्स का, जिसमें ना डाईलोग समझ
आ रहे हो ।
फिल्म बनाना आसान काम नहीं है लेकिन कई बार
सामाजिक मुद्दो पर फिल्म बनाते वक्त निर्माता-निर्देशक पटरी से उतर जाते है और फिल्म
का अंत होने से पहले ही लोग समझ जाते हैं कि उन्होने पैसे खराब कर लिए हैं । सामाजिक
मुद्दो पर फिल्म बनाने से पहले जब तक रिसर्च ठीक से ना कि जाए तब तक फिल्म पूरी नहीं
होती ।
फिल्म बनाना दुनिया के सबसे कठिन कामों में
से एक है । दिन रात महनत करके और ढ़ेर सारी परेशानियों का सामना करने के बाद एक फिल्म
पूरी होती है । फिल्म बन तो जाति है लेकिन अब फिल्म को सिनेमा हॉल तक पहुंचाना कोई
आसान काम नहीं है वो भी अगर फिल्म कम बजट वाली है तो काफि मुश्किल होता है हॉल तक पहुंचना । आपकी
सारी महनत तो दर्शक ही एक दिन में सफलता दिला सकते हैं और खारिज भी कर सकते है । दर्शक
इज किंग .




