Monday, January 17, 2011
कुछ भी टर्न नही कर सकी फिल्म टर्निंग 30
मुख्य कलाकार : गुल पनाग, पूरब कोहली, सिद्धार्थ मक्कड़, अनीता कंवर, राहुल सिंह, समीर मल्होत्रा, इरा दूबे
निर्देशक : अलंकृता श्रीवास्तव
तकनीकी टीम : निर्माता- प्रकाश झा, संगीत- सिद्धार्थ, सुहास
टर्रि्नग 30 जीवन के तीसवें बसंत में प्रवेश कर रही अपरिपक्व और भावुक नैना सिंह के परिपक्व और व्यावहारिक बनने की कहानी है। तीस की उम्र की दहलीज पर खड़ी नैना अचानक खुद को अकेला पाती है। एक तरफ तीन वर्ष पुराना उसका प्रेम संबंध टूट चुका है, तो दूसरी तरफ ऑफिस पॉलिटिक्स के कारण उसकी नौकरी खतरे में है। साथ में तीस की उम्र की मजबूरी और ढलते यौवन का तनाव..। उम्र के इस पड़ाव पर निजी और प्रोफेशनल जीवन के अस्थायित्व से नैना परेशान है। कॉलेज के पुराने मित्र की नजदीकियां भी नैना को खुशियां नहीं दे पाती। आखिरकार,नैना निर्णय लेती है कि वह अपनी खुशियां खुद वापस लाएगी। आत्मबल से नैना बिखरी खुशियों को समेट लेती है। अब वह परिपक्व और समझदार हो चुकी है।
टर्रि्नग 30 हिंदी फिल्मों के दर्शकों को निराश करेगी। फिल्म के 70 प्रतिशत संवाद अंग्रेजी में है। हिंदी के संवाद कभी-कभी सुनने को मिल जाते हैं। टर्रि्नग 30 का परिवेश और ट्रीटमेंट महानगरों के उच्च वर्ग की जीवनशैली को दर्शाता है जिससे आम भारतीयों का रिलेट कर पाना मुश्किल है।
बोल्ड और बिंदास शैली की महिला प्रधान फिल्म है टर्रि्नग 30। हॉलीवुड में ऐसी फिल्मों को चिक फ्लिक कहा जाता है। भारतीय परिप्रेक्ष्य में ऐसी फिल्मों का निर्माण रोचक है। निर्देशिका अलंकृता श्रीवास्तव ने टर्रि्नग 30 के जरिए यह प्रयास तो किया है, पर अनावश्यक दृश्यों को तरजीह देने के कारण फिल्म का मूल कथ्य हाशिए पर चला गया। जिस कारण टर्रि्नग 30 अपने उद्देश्य से दर्शकों को बांध नहीं पाती। गुल पनाग का अभिनय उल्लेखनीय है। गुल ने नैना सिंह की जटिल भूमिका को सहजता से निभाकर एक बार फिर साबित कर दिया है कि वे सक्षम अभिनेत्री हैं।
रेटिंग- 2 स्टार
दर्सक हो गये यमला पगला दीवाना
बड़े अरसे बाद देओल्स फॅमिली दोबारा बड़े परदे पर एक साथ दिखाई दी दर्सको को फिल्म का बेसब्री से इंतजार था खासकर के देओल्स फेमिली के फेंस को २००७ में तीनो देओल्स एक साथ आये थे फिल्म "अपने" में ओर वो एक हिट फिल्म साबित हुई थी !
फिल्म यमला पगला दीवाना दर्सको को खूब पसंद आ रही है फिल्म अब तक तक़रीबन १०० करोड़ का बिजनिस कर चुकी है !!
मुख्य कलाकार : धर्मेन्द्र, सन्नी देओल, बॉबी देओल, कुलराज रंधावा, नफीसा अली, अनुपम खेर, जॉनी लीवर, पुनीत इस्सर, मुकुल देव आदि
निर्देशक : समीर कार्णिक
तकनीकी टीम : निर्माता- समीर कार्णिक, नितिन मनमोहन, गीत- आनंद बख्शी, अनु मलिक, राहुल सेठ
यमला पगला दीवाना हिंदी प्रदेश के फिल्म प्रेमियों के साथ-साथ अप्रवासी भारतीयों को ध्यान में रखकर बनाई गई साफ-सुथरी पारिवारिक मनोरंजक फिल्म है। उल-जुलूल, फूहड़ और अर्थहीन संवादों के जरिए हास्य उत्पन्न करने की बजाए यमला पगला दीवाना सहज रोमांचक परिस्थितियों और रोचक संवादों से हंसाती है। लेखक-निर्देशक ने इस बात को फिल्म के आरंभ में ईमानदारी से स्वीकार किया है कि एक परिवार के बिछड़ने और मिलने की कहानी बहुत पुरानी है।
मां, बीवी और बच्चों के साथ परमवीर कनाडा में रहता है। एक मेहमान जब उनके घर में टंगी एक तस्वीर को देखकर चीखने लगता है कि उन्होंने उसे बनारस में ठगा था तो परमवीर को यकीन हो जाता है कि उसके पिता और छोटा भाई बनारस में हैं। पिता-भाई की खोज में परमवीर बनारस जाता है। बनारस पहुंचते ही परमवीर की मुलाकात ठग भाई गजोधर और पिता धरम से हो जाती है, पर धरम उसे बेटा मानने से इंकार कर देते हैं। गजोधर परमवीर की ताकत का लाभ उठाने के लिए उसे अपनी गैंग में शामिल कर लेता है। पिता और भाई को पाने के लिए परमवीर उनके साथ ठगी के धंधे में उतर जाता है। बनारस पर किताब लिखने शहर में आई साहिबां से गजोधर को प्यार हो जाता है। साहिबां को हासिल करने के प्रयास में परमवीर का बिछड़ा परिवार एक हो जाता है।
यमला पगला दीवाना का आकर्षण धर्मेन्द्र, सन्नी देओल और बॉबी देओल हैं। तीनों का अभिनय सराहनीय है। कॉमिक, इमोशनल, एक्शन दृश्यों में धर्मेन्द्र और सनी देओल हंसाते और रूलाते हैं। दो आइटम सांग, बॉबी-कुलराज पर फिल्माया रोमांटिक सांग और मिर्जा-साहिबा की प्रेम कहानी ने फिल्म को लंबा कर दिया है। कुलराज रंधावा सुंदर हैं, परंतु जब वे स्नातक को सनातक बोलती हैं तो दुख होता है। अनुपम खेर का अभिनय उल्लेखनीय है। सुचेता खन्ना पोली की भूमिका में ध्यान खींचती हैं। । पंजाब में पंहुचने के बाद फिल्म एक पल सोचने का मौका नहीं देती। सिर्फ हंसाती है। समीर कार्णिक की यह अब तक की सबसे अच्छी फिल्म है।
फिल्म यमला पगला दीवाना दर्सको को खूब पसंद आ रही है फिल्म अब तक तक़रीबन १०० करोड़ का बिजनिस कर चुकी है !!
मुख्य कलाकार : धर्मेन्द्र, सन्नी देओल, बॉबी देओल, कुलराज रंधावा, नफीसा अली, अनुपम खेर, जॉनी लीवर, पुनीत इस्सर, मुकुल देव आदि
निर्देशक : समीर कार्णिक
तकनीकी टीम : निर्माता- समीर कार्णिक, नितिन मनमोहन, गीत- आनंद बख्शी, अनु मलिक, राहुल सेठ
यमला पगला दीवाना हिंदी प्रदेश के फिल्म प्रेमियों के साथ-साथ अप्रवासी भारतीयों को ध्यान में रखकर बनाई गई साफ-सुथरी पारिवारिक मनोरंजक फिल्म है। उल-जुलूल, फूहड़ और अर्थहीन संवादों के जरिए हास्य उत्पन्न करने की बजाए यमला पगला दीवाना सहज रोमांचक परिस्थितियों और रोचक संवादों से हंसाती है। लेखक-निर्देशक ने इस बात को फिल्म के आरंभ में ईमानदारी से स्वीकार किया है कि एक परिवार के बिछड़ने और मिलने की कहानी बहुत पुरानी है।
मां, बीवी और बच्चों के साथ परमवीर कनाडा में रहता है। एक मेहमान जब उनके घर में टंगी एक तस्वीर को देखकर चीखने लगता है कि उन्होंने उसे बनारस में ठगा था तो परमवीर को यकीन हो जाता है कि उसके पिता और छोटा भाई बनारस में हैं। पिता-भाई की खोज में परमवीर बनारस जाता है। बनारस पहुंचते ही परमवीर की मुलाकात ठग भाई गजोधर और पिता धरम से हो जाती है, पर धरम उसे बेटा मानने से इंकार कर देते हैं। गजोधर परमवीर की ताकत का लाभ उठाने के लिए उसे अपनी गैंग में शामिल कर लेता है। पिता और भाई को पाने के लिए परमवीर उनके साथ ठगी के धंधे में उतर जाता है। बनारस पर किताब लिखने शहर में आई साहिबां से गजोधर को प्यार हो जाता है। साहिबां को हासिल करने के प्रयास में परमवीर का बिछड़ा परिवार एक हो जाता है।
यमला पगला दीवाना का आकर्षण धर्मेन्द्र, सन्नी देओल और बॉबी देओल हैं। तीनों का अभिनय सराहनीय है। कॉमिक, इमोशनल, एक्शन दृश्यों में धर्मेन्द्र और सनी देओल हंसाते और रूलाते हैं। दो आइटम सांग, बॉबी-कुलराज पर फिल्माया रोमांटिक सांग और मिर्जा-साहिबा की प्रेम कहानी ने फिल्म को लंबा कर दिया है। कुलराज रंधावा सुंदर हैं, परंतु जब वे स्नातक को सनातक बोलती हैं तो दुख होता है। अनुपम खेर का अभिनय उल्लेखनीय है। सुचेता खन्ना पोली की भूमिका में ध्यान खींचती हैं। । पंजाब में पंहुचने के बाद फिल्म एक पल सोचने का मौका नहीं देती। सिर्फ हंसाती है। समीर कार्णिक की यह अब तक की सबसे अच्छी फिल्म है।
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