Monday, January 17, 2011

दर्सक हो गये यमला पगला दीवाना

बड़े  अरसे  बाद  देओल्स  फॅमिली  दोबारा  बड़े  परदे  पर  एक  साथ  दिखाई  दी दर्सको को फिल्म  का बेसब्री  से इंतजार था  खासकर के देओल्स फेमिली  के फेंस को २००७ में  तीनो देओल्स एक साथ आये थे फिल्म "अपने" में ओर वो एक हिट फिल्म साबित हुई थी !


 फिल्म यमला पगला दीवाना दर्सको को खूब पसंद आ रही है फिल्म अब तक तक़रीबन १०० करोड़ का बिजनिस कर चुकी है !!



मुख्य कलाकार : धर्मेन्द्र, सन्नी देओल, बॉबी देओल, कुलराज रंधावा, नफीसा अली, अनुपम खेर, जॉनी लीवर, पुनीत इस्सर, मुकुल देव आदि
निर्देशक : समीर कार्णिक
तकनीकी टीम : निर्माता- समीर कार्णिक, नितिन मनमोहन, गीत- आनंद बख्शी, अनु मलिक, राहुल सेठ

यमला पगला दीवाना हिंदी प्रदेश के फिल्म प्रेमियों के साथ-साथ अप्रवासी भारतीयों को ध्यान में रखकर बनाई गई साफ-सुथरी पारिवारिक मनोरंजक फिल्म है। उल-जुलूल, फूहड़ और अर्थहीन संवादों के जरिए हास्य उत्पन्न करने की बजाए यमला पगला दीवाना सहज रोमांचक परिस्थितियों और रोचक संवादों से हंसाती है। लेखक-निर्देशक ने इस बात को फिल्म के आरंभ में ईमानदारी से स्वीकार किया है कि एक परिवार के बिछड़ने और मिलने की कहानी बहुत पुरानी है। 

मां, बीवी और बच्चों के साथ परमवीर कनाडा में रहता है। एक मेहमान जब उनके घर में टंगी एक तस्वीर को देखकर चीखने लगता है कि उन्होंने उसे बनारस में ठगा था तो परमवीर को यकीन हो जाता है कि उसके पिता और छोटा भाई बनारस में हैं। पिता-भाई की खोज में परमवीर बनारस जाता है। बनारस पहुंचते ही परमवीर की मुलाकात ठग भाई गजोधर और पिता धरम से हो जाती है, पर धरम उसे बेटा मानने से इंकार कर देते हैं। गजोधर परमवीर की ताकत का लाभ उठाने के लिए उसे अपनी गैंग में शामिल कर लेता है। पिता और भाई को पाने के लिए परमवीर उनके साथ ठगी के धंधे में उतर जाता है। बनारस पर किताब लिखने शहर में आई साहिबां से गजोधर को प्यार हो जाता है। साहिबां को हासिल करने के प्रयास में परमवीर का बिछड़ा परिवार एक हो जाता है।
यमला पगला दीवाना का आकर्षण धर्मेन्द्र, सन्नी देओल और बॉबी देओल हैं। तीनों का अभिनय सराहनीय है। कॉमिक, इमोशनल, एक्शन दृश्यों में धर्मेन्द्र और सनी देओल हंसाते और रूलाते हैं।  दो आइटम सांग, बॉबी-कुलराज पर फिल्माया रोमांटिक सांग और मिर्जा-साहिबा की प्रेम कहानी ने फिल्म को लंबा कर दिया है। कुलराज रंधावा सुंदर हैं, परंतु जब वे स्नातक को सनातक बोलती हैं तो दुख होता है। अनुपम खेर का अभिनय उल्लेखनीय है। सुचेता खन्ना पोली की भूमिका में ध्यान खींचती हैं। । पंजाब में पंहुचने के बाद फिल्म एक पल सोचने का मौका नहीं देती। सिर्फ हंसाती है। समीर कार्णिक की यह अब तक की सबसे अच्छी फिल्म है। 





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