जिंदगी के वो पल जो हमने हंसी मजाक में गुजार दिए शायद अब कहीं याद आते है ओर सोचता हूँ की हमने बहुत अच्छा किया की वो पल मजे में जी लिए क्योकि आज का जीना भी कोई जीना है.
हर पल कुछ हासिल करने की लालसा ने दिल ओर दिमाग को दिवालिया कर दिया है,
ख़ुशी, गम और त्यौहार तो जैसे नाराज होकर कोसो दूर कहीं चले गए हैं ओर पीछे छोड़ गए एक इठलाता ओर झुंझलाता हुआ सपना.
ये सपना आगे भागता जा रहा है हम बेसुध होकर पीछे दौड़ लगा रहे है , शायद इसीलिए जन्म लिया था इसीलिए स्कूल से लेकर कालिज की किताबो का कल्याण किया था, अब सोचता हूँ अगर हम न होते तो वो किताबे कौन खरीदता, हम न होते तो स्कुल वालो को मोटी फीस कहाँ से मिलती, हम न होते तो किताबो के लेखको का घर कहाँ से चलता, वो पेन पेंसिल बनाने वालो को रोटी कहाँ से मिलती.
दरसल वो एक खेल था और हम उसके मोहरे थे लोग मिलते गए हमसे खेलते गए और वो हमारे बलबूते अपना घर बसाते गए आज वो महलो में रहते है और हम............
शायद ज्ञान की धारा में हम ठीक से बह नही पाए
गहरा समंदर था हम पैर जमा नही पाए !!
अब हालत एक सन्यासी जैसी हो गयी है जिसके पास बहुत कुछ था 'हंसी ख़ुशी गम' लेकिन उसने सबकुछ खो दिया अब न कुछ पाने की तमन्ना है ओर न कुछ खोने के लिए बचा है....
जिंदगी के वो पल जो हमने हंसी मजाक में गुजार दिए अब बहुत याद आते है....जारी है
1 comment:
Wow
i like ur think
god help u in new year
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