Friday, April 6, 2012

टीवी का बनाया हुआ ‘नायक’ निर्मल बाबा


निर्मल बाबा का प्रचार प्रसार खुब हो रहा है, घर घर में निर्मल बाबा के उपायों की चर्चा है निर्मल बाबा की चर्चा है काफि लोग हंसते है काफि लोग आंख बंद करके कोटि कोटि प्रणाम कर रहे है । लोग बड़ी सिद्दत से सेवा भाव से 2-3 हजार खर्च करके सामागम में जा रहे हैं ।

कई लोग 2012 के अंत तक निर्मल बाबा की दुकान बंद होने की भी बात कर रहे हैं ।

आखिर है कौन ये बाबा जो इतनी जल्दी हमारे और आपको घरों में अपनी जगह बनाने में कामयाब हो रहा है ।

क्या है इसके पास एैसा जो लोग इसके बताए गए उपायों से ठीक हो जा रहें है लोगो पर कृपा बरस रही है ।

क्या ये कोई भगवान है या भगवान के रुप में कोई फरिस्ता । या ये सिर्फ टीवी द्वारा बनाया गया वो नायक है जो लोगो के दिलों में अपनी जगह बना चुका है ।

लोगों के बीच निर्मल बाबा को नायक बनाने में टीवी की भूमिका कितनी है और हमारे अंधविश्वासी समाज की कितनी ।

दरअसल बाबा की सच्चाई से पर्दा उठना तो अभी बाकि है लेकिन ये जो कोई भी है टेलिविजन ने इसे भगवान बना दिया है । वही टेलिविजन जो मुंबई हमले के वक्त हमारी तैयारियों की जानकारी पाकिस्तान पहुंचाता रहा वहीं टेलिविजन जिसने पड़ोसी मुल्कों को चिल्ला चिल्ला कर ये बता दिया कि हमारे पास लड़ने के लिए प्रयाप्त हथियार और गोले नहीं है आप चाहें तो हमला कर सकते हैं ।

टीवी कि भुमिका पर अकसर सवाल उठता आया है खासकर उस टीवी कि भुमिका पर जो समाज के असल मुद्दों को सामने लाता है बात खबरियां चैनलों की हो रही है ।

लोगों ने जब जब मुझसे ये कहा कि टीवी बाजारवाद के काले साए में घिर चुका है तो मैने हमेशा से उनकी बात का विरोध किया और हमेशा से ही उन्हे ये समझाने की कोशिश की कि एक चैनल को चलाने में बहुत खर्चा होता है ।

मैं आज भी अपनी बात पर कायम हूं कि चैनल को चलाने में बहुत पैसा खर्च होता है लेकिन उस पैसे को निकालने के लिए हमारे पास विज्ञापन होते है लेकिन जब हम विज्ञापन की रेस से बाहर निकलकर इस तरह के बाबाओं को अपने चैनल की शान समझने लगते है तो वाकई दुख होता है ।

हम ये कर क्या रहे हैं आखिर हम करना क्या चाहते है किस तहर की जिम्मेदारियां हम निभा रहे हैं हम कौन सा समाज तैयार कर रहे है हम अपनी आने वाली जेनरेशन को देना क्या चाहते है । निर्मल बाबा ।

 भुखमरी से परेशान देश के लोगो को सैंडविच खाने की सलाह देने वाले ढोंगी बाबा की काली कमाई का हिस्सा हम हज्म कर पाएंगे य़ा नहीं ।

दरअसल हमारे देश में टेलिविजन माध्यम की ताकत इतनी  बढ़ चुकी है कि चंद मिनटों में किसी को भी हिरो या भगवान बनाया जा सकता है

लेकिन दुर्भाग्य ये है कि चंद पैसे को लिए हम निर्मल बाबा जैसे ढोंगियों की जमीन तैयार कर रहे हैं । टीवी एक एैसा माध्यम है जो किसी को भी हीरो बना सकता है बसर्ते आप उसकी कीमत चुका सकें ।

लेकिन सवाल ये है कि अगर टीवी इतना प्रभावसाली हो चुका है तो इसका फायदा अंधविश्वास को बढाने में होना चाहिए या समाज हित में.

क्या हम अपनी ही आने वाली जेनरेशन के लिए एक अंधविश्वासी कुआं तैयार कर रहे हैं जो एैसे बाबा लोगो के चंगुल में आकर इसी कुएं में डूबने वाली है ?

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