सम्लेंगिकता नयी चीज नहीं है . सदियों से इसका चलन चलता आ रहा है. पर इसे कभी सामाजिक मान्यता नहीं दी गई. यह एक घोर अपराध है. कोई चीज पुराणी होने से स्विकरिया नहीं होती है.मर्डर, रैप, चोरी ये सभी सदियों से चले आ रहे है इसलिए इन्हे मान्यता तो नहीं दी जा सकती . तर्क यह भी दिया जा रहा है ज्यादातर कामयाब लोग सम्लेंगिक है.लेकिन यह एक बेकार सोच है.
भारत में परिवार सबसे बड़ी ओर सफल संस्था है. यह भारतीय परम पारा ,सभ्यता , ओर संकृति का परिचालक है. इसमे सम्लेंगिकता का वायरस घुसना एक षडयंत्र है.
संविधान में नागरिक स्वतंत्रता की बात की गई है.
लेकिन संविधान में साथ ही यह भी कहाँ गया है की मर्यादा ओर लोक परम्परा के विरूद्व कोई भी स्वतंत्रता मान्य नहीं होगी.
संविधान में तो अधिकारों के साथ दयित्यावो का जिक्र बगही किया गया है. सिर्फ़ अधिकारों की बात करे ओर दायित्वों का निर्व्हारण करे, तो यह अपराध होगा !!
सस्त्रो में सम्लेंगिकता का कहीं कोई जीकर नही है. भितिचित्रो के मध्यम से ही इसे कहीं कहीं दिखाया गया है. विवाह से पहले जो भी सम्बन्ध होते है वो सभी अपराध है. यदि इसे बढ़ावा मिलता है तो आगे चलकर बचो का बंटवारा, सम्पति विवाद सहित ऐसे अनेक असाध्य रोग फेलेंगे.
जिसका parinam भयंकर होगा.......
सम्लेगिकता एक संगठित सेक्स अपराध है..सरकार यदि इसे कानून के दायरे में लती है तो इसका रास्ट्रीय इस्टर पर विरोध किया जाएगा.....इस बीमारी से देश के युवाओ को बचने के लिए हम सबको कुछ कुछ करना पड़ेगा,,,,,,,,,,,,,,
shyam tyagi
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